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Sunday, October 11, 2009

मेरी नेहबर लदकी meri nehbar ladaki erotic

हेल्लो रेअदेर होव र उ । इ म अयुश फ़रोम पुनजब i m the writer of this story.I want to tell u my true story.

मेन अपनि TY ARTS कि सतुदी पुरि कर चुका था।और मेन अभ अगे काम मेन जने कि चोच रहा था। लकिन हुमरा घर सोल्लेगे से बहुत दूर पदथे था । तो मेन अपने चचा के घर रेहने लगा बोह सोल्लेगे के नगदिक था । मेरे उनसले का लदका हैन जो फ़ोरेगिओन गिया हुया हा। मेन सुबह सोल्लेगे जता और शम 5 ओ,सलोसक वपिस आ जता। मेरे उनसले के नेघबौर मेन एक फ़मिली रेनत पेर तेहरि हुइ थि ।थत फ़मिली हवे थरी गिरलस (मिना।अकनशा-पूजा)जो सबसे बदि मिना को देख केर मेरा मन उसपेर लतू होने लगा बोह है हि इतनि सुनदेर। उसकि चोति बेहन कभि कभि उनसले के घर अया करति।मेने उसके जरिये मिना से बात करने का इरधा बनया।लकिन दर रेहता कि अगर येह नह करगै या किसि को बता दिया तो किया होगा। मेने होनसला केर एक लत्तेर लिख उसे दे दिया ।कि इसे मिना को देदेना ।

मेन उसे जितना बचा समझता था वोह उतनि नहि थि ।वोह समझगै और बोलि अप्प कुध दे अयो। मेने जैऐ वैसे उसे मना लिया। नेक्सत दय मेन फिर उसका इनतज़ार करने लगा । वोह 7 ओ ।सलोसक हुमरे घर अयि और औनति से बात करने लगि मेन चथ पेर चला गिया तो बोह भि भना बना केर उपेर आ गै । मेने उस्से लत्तेर केर बरे मेन उचा तो उसने मुझे लत्तेर देखा केर बरा मेन रख लिया उर बोलि कुध हि लेलो ।

मेन उसकि बात सुन केर हरन रेह गिया अरे येह तो बहुत हि चलु पिएसे है। मेने उसकि कमिज़ मैन हथ दल्ल दिया और लत्तेर के बहने उसके बूबस दबने लगा तो बोह बोलि किया बात रात रनगिन करने का इरदा है किया मेन उसकि बात सुनकेर सुन्न रेह गिया कि अभि इसके अगे 14 येअरस है ओर येह तो? मेने हान करदि तो बोलि चलते हैन किसि होतेल मेन । मेने अपनि बिके लि ओर होतेल मेन चल दिया ।वहन हुम सरि रात एक दुसरे के साथ सेक्स करथे रहे । उसने बतये कि उसने पेहलि बर मुझसे हि सेक्स किया हैन । बोह बहुत कुश थि । केहति बहुत मजह अये

बाद मेन लत्तेर मनगा तो उसने देदिया लकिन एक सरत पेर कि मेन उसे ऐसा हि मझा फिर दु । मेने उस्स ए बहि लिता लिया उसने अभि उनदेरवेअर नहि पेहना था। इ दो थे मी सोसक ओन हिस दिसक &दो इन दीप इन दीएप । वोह सिसरा रहि थि ऊऊऊऊओह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह हीईईईई और अनदेरोह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्ह फद दलो। अहहहहहहह्हहह्हह। अफ़तेर1/2 हौरस हुम अकेले हुये । उसने अपने सलोथेस पेहने मेने अपने । उसके बाद मेने लत्तेर पदा तो मुझे हरनि हुइ कि उसकि सिसतेर भि मुझ पेर मरति है।

that invite me in her house in night . pooja said that in the night noone in her house . that day i dont go the college &in the night i go to her house &do the ring . pooja opened the door7gave me a nice smile .then we go in her sister room that say that do the my wait . her sister make the launch for all .we ate . then we do the sex in group . i m happy in midnight i came back . जब हुमको तिमे मिलता है तो हुम सेक्स करथे हैन ।any girl in punjab who want do the friendship with me that contact by my mail then next step my e mail id bawa_lovely@yahoo.co.in. मेन अगे कि सतोरी नेक्सत तिमे लिकुनघा

बारिश मैं शिल्पा का साथ - Barish mein Shilpa Ke Saath - Romantic sex story in Hindi

बारिश मैं शिल्पा का साथ - Barish mein Shilpa Ke Saath - Romantic sex story in Hindi

प्रेषक : इवेन्ट मैनेजर जयपुर

उम्र २३ वर्ष।

हाईट ५’८”

साइज ९”

तो दोस्तों बात उस दिन की है जब बारिश हो रही थी और मैं भीगता हुआ अपने घर की तरफ़ अपनी बाइक पे जा रहा था। शाम के करीब ५:३० का समय था। अचानक मैने देखा कि मेरी तरफ़ कोई लिफ़्ट के लिये कोई हाथ हिला रहा था, गौर से देखा तो वो २५-३० साल की एक युवती थी। मैने बाइक रोकी। वो मेरे पास आके पूछने लगी कि आप कहां जा रहे हो?

मैने कहा-आपको कहां जाना है?

वो रेलवे स्टेशन जाना चाहती थी। मैने कहा कि मैं भी वहीं जा रहा हूं (जबकि मैं अपने घर जा रहा था)। वो मेरे पीछे बैठ गई। मैं बाइक को रफ़्तार से दौड़ाने लगा। उसके मोम्मे मेरी पीठ से सटे हुये थे। मैं गरम हो रहा था। बातों बातों में पता चला कि वो जयपुर में जोब करती है, उस का पति दिल्ली में कोई प्राइवेट जोब करता था और वो अपनी बेटी को लेने के लिये जा रही थी जो आज़ ट्रेन से आने वाली थी।

हम रेलवे स्टेशन पहुँच गये थे, ट्रेन आने में अभी थोड़ा टाइम था, हम कैंटीन में चाय पीने चले गये। कैंटीन में उस ने जैसे ही उस ने अपना रेन कोट उतारा तो मुझे उस की जवानी के दर्शन हुये। गज़ब की खूबसूरती थी उस की। सफ़ेद रंग के टोप में उस की ब्रा भी चमक रही थी सो उसके मोम्मों के साइज़ का अंदाज़ा लगाना कोई मुश्किल नहीं था। एक दम गोरी चिट्टी थी वो।

चाय पीते हुये मैने उसके हुस्न का नज़ारा लिया और खूब बातें भी की। सर्दी के मौसम में उस की गरम जवानी ने मेरे रोम रोम में गरमी भर दी थी और मेरा लण्ड अपने आपे से बाहर हो रहा था।

तभी ट्रेन भी आ गयी। हमने उस की ५ साल की बेटी को साथ लिया और फ़िर मैने उसे कहा- मैं आपके घर तक छोड़ देता हूं।

उस ने मना किया लेकिन मैं जानना चाहता था कि वो कहां रहती है क्योंकि वो मुझे बता चुकी थी कि वो अकेली ही रहती है। मैने दोनो को बाइक पे बैठाया और उस के घर की तरफ़ चल दिया।

उस का घर आते ही बारिश भी तेज़ हो गयी। उस ने मुझे बारिश रुकने तक रुकने के लिये कहा और मैं भी तो यहि चाहता था। मैं पूरी तरह भीग चुका था। उसने कॉफी बनायी और चेंज कर के जब वो मेरे सामने आयी तो ब्लैक सिल्की नाइटी में वो कॉफी से भी ज़्यादा गरम लग रही थी। दिल कर रहा था कि अभी चोद डालूँ साली को।

सफ़र की वजह से उसकी बेटी आते ही सो गयी थी, बारिश रुकने का नाम नही ले रही थी। तभी लाइट भी चली गयी। वो केंडिल लेने के लिये उठी, मैं भी उसकी मदद करने लगा लेकिन केंडिल नहीं मिली। अंधेरे में वो मुझ पर गिर गयी। वाह क्या गरमी थी। उसने उठने की कोशिश की लेकिन मैने उसको अपनी बाहों में भर लिया और छोड़ा ही नहीं, पहले उसने विरोध किया लेकिन वो भी शायद कई दिनो की प्यासी थी तो उसने भी ज़्यादा कोशिश नहीं की।

मैने उसके मोम्मे दबाने शुरु कर दिये, वो गरम हो रही थी। मैने धीरे धीरे अपना एक हाथ उसकी नाइटी उठाते हुये उसकी पैंटी में डाल दिया। वो सिहर उठी। मैने अपना मुँह उस की चूत के पास लाके उस की पैंटी को अलग कर दिया।

उसकी बालों वाली चूत एकदम सेक्सी थी। मैने उसमें अँगुली करनी शुरु कर दी। वो आआआअह कर रही थी। मस्ती उफ़ान पे थी। मेरे दोनो हाथ उसके मोम्मों पे थे। वो आंखें बंद करके मेरा साथ दे रही थी।

जब उस से रहा नहीं गया तो उसने कहा- प्लीज़ अब चोद भी दो, मैं बहुत दिन से प्यासी हूं।

मैने अपनी पैंट उतार दी। मेरा लण्ड देखते ही वो खुश हो गयी। मैने उसकी दोनो टांगों को खोला और फ़िर अपना अंडरवियर।

अपना लण्ड एक ही झटके में उस की चूत में डाल दिया। वो ऊऊऊउह की आवाज़ में मज़ा ले रही थी। अब कमरे में उस की आहें और फ़चाक फ़चाक की आवाज़ें गूंज रही थी।

वो बोली- और ज़ोर से चोदो मुझे, फ़ाड़ डालो मेरी चूत को। यो साली बड़े दिन से लण्ड की भूखी है। आज इस की भूख और मेरी प्यास बुझा दो। चोदो चोदो और ज़ोर से चोदो मुझे।

उसके बोलने के साथ ही मेरी स्पीड भी बढ़ रही थी। ये सिलसिला करीब २५ मिनट चला फ़िर हम दोनो शांत होकर एक दूसरे से लिपट के लेटे रहे।

१० मिनट बाद वो उठी और मेरे लण्ड को अपने हाथ में ले लिया। उसने बड़े प्यार से मेरे लण्ड को कहा- यू आर सो स्वीट और अपने मुँह में डाल लिया। वो लण्ड को ऐसे चूस रही थी कि मानो लोलीपोप चूस रही हो।

मेरा लण्ड दोबारा से चुदाई के लिये तैयार हो गया था। १५ मिनट के बाद मैने उसे घोड़ी बनाया और फ़िर पीछे से उसकी गांड में अपना लण्ड डाल दिया। वो चुद रही थी, मैं चोद रहा था। ये चुदाई सारी रात में ६ बार हुई।

बारिश भी तभी रुकी जब सुबह हुई और उसकी प्यास मैने बुझा दी।

उसके बाद जब भी वो या मैं चाहते तो मिलकर ये चुदाई का खेल खेलते हैं।

Unknown Aunty fucking - sex sotry in Hindi language

Unknown Aunty fucking - sex sotry in Hindi language

मेरा नाम अमित है। मैं २४ साल का कालबोय हूँ। मेरे लंड का साइज ८”, मोटाई ३” है। मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ।

एक बार मुझे एक मेल मिली। जिसमे एक महिला ने अपना फ़ोन नम्बर दिया हुआ था। मैंने उस नम्बर पर सम्पर्क किया तो उधर से एक भारी सी आवाज सुनाई दी। मैंने उसको अपने बारे में बताया तो उसने मुझे रात को आठ बजे आने को कहा। वो अम्बाला कैंट में रहती थी।

मैं रात को ठीक आठ बजे तैयार होकर उसके घर के सामने था। ऐसे तो मैंने कईयो को चोदा है पर जब भी किसी औरत का फ़ोन आता तो मैं रोमांचित हो जाता हूँ।

मैं उसके घर पहुंचा तो दरवाजा उसी ने ही खोला। वो मुझे सीधे अपने बैडरूम में ले गई और मुझे वहाँ बिठा कर ख़ुद रसोई में चली गई। जब वो वापस आई तो उसके हाथ में चाय के दो कप थे। वो मुझे चाय देकर मेरे पास में ही बैठ गई।

वो मुझे बड़े ध्यान से देख रही थी। वो ३७ - ३८ साल की ठीक ठाक सी औरत थी।

हमने बातें शुरू की तो उसने मुझे बताया कि उसकी किसी सहेली ने ही उसे मेरा पता दिया था जिसे मैंने पिछले महीने चोदा था। उसका पति ज्यादातर बाहर ही रहता है जिससे वो अपनी इच्छाओं को पूरा नहीं कर पाती थी। उसके कोई बच्चा भी नहीं था जिससे वो और भी ज्यादा उदास रहती थी।

मैं उसके थोड़ा नजदीक गया। मैंने उसके चूचों पर हाथ रखा। इस उमर में भी उसके चुचे टाइट थे मैंने उनको दबाना शुरू कर दिया। वो आह !शी !शी आह ! कर रही थी।

वो मेरे और करीब आ गई और उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया। मैंने उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया। वो इसमें मेरा साथ देने लगी। वो मुझे जोर जोर से किस करने लगी जैसे कई सालों से प्यासी हो। वो मेरे होंठों को जोर जोर से चूस रही थी। मैंने उसकी साड़ी को निकाल दिया और उसकी ब्लाऊज़ को उससे अलग कर दिया। उसने ब्रा नहीं डाली थी। उसकी भारी भारी चुचियाँ अब आजाद थी और मैं उनसे खेलना लगा।

मैंने अपने होठो को उसकी निपल पर फिरना शुरू कर दिया उसने जोर से मेरा सर पकड़ लिया। मैं उसकी चूची को चूस रहा था। वो आहें भर रही थी उसका हाथ कभी कभी मेरी जांघों तक चला जाता था। मैंने अपनी चैन खोली और अपना लंड उसके हाथ में पकड़ा दिया वो उससे खेलने लगी।

मैंने अपना हाथ उसकी दोनों टांगो के बीच में डाला। मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने अपना हाथ भट्टी पर रख दिया हो। मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत में डाल दी। वो आह करने लगी। उसकी चूत टाइट थी। बिल्कुल नई लड़की की तरह। मैं उसकी चूत में उँगली जोर जोर से घुमाने लगा। उसे मजा आ रहा था।

मैंने उसका सर पकड़ा और नीचे ले गया। एक बार तो उसने मना किया पर दूसरी बार कहने पर मेरा लंड उसने अपने मुँह में ले लिया, वो उसे पहले धीरे धीरे चूम रही पर अब वो उसे अच्छे से चूस रही थी उसको उसमें मजा आने लगा था।

मैंने करवट बदली, उसका सर मेरे पैरों की तरफ़ और मैं उसके पैरों की तरफ़ था यानी मेरा सर उसकी चूत पर और मेरा लंड उसके मुँह पर। मैंने उसकी टांगो को फ़ैलाया और अपना मुंह उसकी चूत पर रख दिया। उसने कस कर मेरे चूतडों को अपनी बांहों में भर लिया। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। वो आह आह सी….. आह कर रही थी उसको मजा आ रहा था वो मेरे लंड को जोर जोर से चूस रही थी।

वो गरम हो चुकी थी वो मुझसे बोली कि अब और मत सताओ और अपना लंड मेरी चूत में डाल दो। मैं अभी और मजा लेना चाहता था पर उसके बार बार कहने पर मैं उसकी टांगो के बीच में बैठ गया। मैंने उसकी दोनों टांगे ऊपर उठाई और उसकी गांड के नीचे तकिया दिया। मैं अपने लंड पर निरोध लगाने लगा पर उसने मना कर दिया। कहने लगी शायद आप से ही मेरी कोख भर जाए।

मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख थोड़ा जोर लगाया। पर चूत टाइट होने के कारण अन्दर जाने में दिक्कत हो रही थी। मैंने अबकी बार थोड़ा सैट करके जोर लगा तो मेरा लंड थोड़ा अन्दर चला गया।

पर वो चिल्लाई,”प्लीज आराम से करो दर्द हो रहा है”

मैंने कहा, ”ठीक है पर थोड़ा तो सहना पड़ेगा”

उसने गर्दन हिलाई। मैंने उसकी टांगों थोड़ा और ऊपर उठा कर जोर लगाया तो मेरा आधा लंड उसकी चूत में समां गया। मैंने फ़िर से धक्का लगाया और पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया और धक्के लगाने शुरू कर दिए।

वो बोले जा रही थी ” प्लीज आराम से करो, दर्द हो रहा है”

पर मैं अपनी मस्ती में धक्के लगा रहा था। अब वो भी मेरा साथ दे रही थी, बोल रही थी ” अमित मेरी चूत को जरा और जोर से चोदो, आज बहुत दिनों के बाद इसकी प्यास बुझी है”

मैं जोर जोर से धक्के लगाये जा रहा था और वो बोले जा रही थी- और जोर से चोदो अमित और जोर से।

वो बोली- अमित जोर से करो मैं झड़ने वाली हूँ।

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी, वो झड़ चुकी थी पर मेरा अभी बाकी था, मैं लगा हुआ था।

४० मिनट के बाद मुझे लगा कि मेरा भी होने वाला है और चार पाँच धक्कों के बाद मैं उसके ऊपर गिर पड़ा उसने मुझे जोर से अपनी बाहों में भर लिया। हम कुछ देर इसी तरह पड़े रहे फिर अलग हो गए।

इसके बाद हमने एक दूसरे को साफ़ किया उसने मेरा चाट कर और मैंने उसकी चाट कर।

फिर हमने खाना खाया जो उसने पहले ही बना कर रखा हुआ था।

और इस तरह उस रात हमने चार बार मजा लिया। सुबह उसने मुझे मेरे फीस के पैसे दिए और मैं चला आया।

इसके बाद उसने मुझे सात आठ बार बुलाया। अब वो एक बच्चे की माँ बनने वाली है। जिसके लिए वो मेरा अहसान मानती है।

Bhabhi Ki Chudai - ललिता भाभी की चुदाई

[size=150]Bhabhi Ki Chudai - ललिता भाभी की चुदाई[/size]

मेरा नाम नन्द है, मैं ग्वालियर में रहता हूँ। मुझे पहली बार सेक्स का अनुभव करने का मौका तब मिला जब मैं २१ वर्ष का था, आज मैं वह अनुभव आप सब से बाँटने जा रहा हूँ। इस समय मेरी उम्र २३ साल की है और मेरा शरीर तंदुरुस्त है और मेरी लम्बाई ५'९" है।
मैंने अपना कुँवारापन अपनी पड़ोस में रहने वाली भाभी के साथ खोया। उनकी सुन्दरता के बारे में क्या बताऊँ आप लोगों को ! फिगर ३५-३०-३६ की होगी। उनके मनमोहक शरीर को देखकर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है। उनके साथ सेक्स करकने की तमन्ना दिल में कब से थी। उनकी उम्र ३० साल की होगी।
एक दिन ऐसा आया जब मुझे उनके बदन को चूमने का मौक़ा मिला। भैया एक बिज़नेसमैन हैं और वो सुबह ही निकल जाते हैं। उनके २ बच्चे भी स्कूल चले जाते हैं। सुबह जब वह कपड़े सुखाने आती है, तब मैं हमेशा उनकी चूचियों और पेट को देखा करता हूँ। उन्होंने कई बार शायद मुझे देखा भी है कि मैं उन्हें छुप कर उन्हें देखता हूँ, पर उन्होंने कभी किसी से कुछ कहा नहीं। उनके मम्मों को देख कर उनका दूध पीने की इच्छा जाग जाती है। तो दोस्तों आपको अधिक बोर नहीं करते हुए मैं आपको अपना अनुभव सुनाता हूँ।
एक दिन की बात है, मुझे शहर में किसी काम से बाहर जाना था। घर में माँ और पिताजी दोनों ही नहीं थे, और घर में हेलमेट भी नहीं था और कविता भाभी के घर में सिर्फ कविता भाभी ही थी। मुझे अचानक याद आया कि भाभी के घर हेलमेट हो सकता है। तो मैं घर पर ताला लगा कर भाभी के घर हेलमेट लेने चला गया। भाभी कपड़े धो रही थी। जब वह कपड़े धोते हुए उठी तो उनकी साड़ी एक ओर हटी हुई थी और मुझे उनकी दोनों चूचियाँ ब्लाऊज़ में से दिखाई दे रहे थे। मन हो रहा था कि दूध पी लूँ। मैं उन्हें टकटकी लगा कर देखता जा रहा था, भाभी ने भी यह ग़ौर किया और अपनी साड़ी ठीक करते हुए मुझसे काम पूछा।
मैंने बताया कि हेलमेट चाहिए। भाभी ने कहा कि हेलमेट तो कमरे के ऊपर स्टोर में रखा है, चढ़कर उतारना पड़ेगा। भाभी और मैं कमरे में आ गए। मैं एक कुर्सी लेकर आ गया। भाभी ने मुझसे पूछा,"तुम रोज़ मुझे छुप-छुप कर क्यों देखते हो?"
मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर भाभी से क्या कहूँ,"आप बहुत सुन्दर हैं और आपका शरीर ऐसा है कि देखने वाला बस देखता ही रह जाए। भैया बहुत भाग्यशाली हैं जो उन्हें आप जैसी पत्नी मिलीं।"
भाभी ने एक शरारत भरी मुस्कान से मुझे देखा. मैंने उनसे कहा कि मैं उन्हें एक बार चूमना चाहता हूँ। उन्होंने थोड़ा झिझकते हुए हामी भर दी। मैंने उनके गालों पर चूम लिया और उसके साथ ही अपना एक हाथ उनकी कमर पर रख दिया और सहलाने लगा।
भाभी ने हँस कर कहा, "अब ठीक है, या कुछ और भी करना है?"
मन तो कर रहा था कि कह दूँ, पर हिम्मत नहीं हो रही थी। तो मैंने भी हँस कर कह दिया, "अनुमति मिल जाए तो सब कुछ कर दूँगा।"
वह मुझे शैतान कह कर कुर्सी पर चढ़ गई। अब भाभी अपने दोनों हाथ ऊपर कर के हेलमेट तलाश कर रही थी। उसे इस अवस्था में खड़ा देखकर मेरा लंड भी खड़ा हो गया। मैं उनके मम्मों और पेट को ही देखे जा रहा था। पहली बार मैंने उन्हें इतने नज़दीक से देखा था। अब मेरा नियंत्रण छूट रहा था। तभी भाभी ने मुझसे कहा कि कुर्सी हिल रही है, मुझे आकर पकड़ लो, नहीं तो मैं गिर जाऊँगी।
अब क्या था, मैंने भाभी की गाँड के नीचे से इस तरह पकड़ा कि मेरा चेहरा उनके पेट के सामने रहे। मेरे और उसके पेट के बीच कुछ ही सेन्टीमीटर का फ़ासला था। अब मेरा नियंत्रण छूट गया और मैंने भाभी के पेट पर चूम लिया।
भाभी सहम गई पर कुछ कहा नहीं। इससे मेरी हिम्मत और बढ़ी और मैंने उसके पेट पर किस करना शुरु कर दिया। मैं उन्हें पेट पर चूम रहा था और उनकी नाभि को खा रहा था। अब वो मेरा सिर पकड़ कर अपने पेट से चिपकाने लगी और लम्बी-लम्बी साँसों के साथ हल्की सिसकियाँ लेने लगी।
उन्हें भी बड़ा मज़ा आ रहा था। १५ मिनटों तक उनके पेट को खाने के बाद वह कुर्सी पर बैट गई और मुझसे लिपट गई। अब मुझे हरी झंडी मिल गई थी। मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने अपने कपड़े उतार दिए और उसकी साड़ी भी। वह सच में कितनी सेक्सी लग रही थी - काम की देवी। मैं उसके होंठों को चूसने लगा। वो भी प्रत्युत्तर देने लगी। फिर मैं धीरे-धीरे उसके गले से होते हुए उसकी चूचियों तक पहुँचा।
उसकी चूचियों को चूसता और दबारा रहा और वह सिसकियाँ निकालती रही। अब मैंने उसकी ब्लाउज़ उतार दी और पेटीकोट में घुस कर उसकी चूत को पैन्टी के ऊपर से ही सहलाने लगा। अब मैंने उसे पूरा नंगा कर दिया। उसकी चूत में अपनी ऊँगलियाँ प्रविष्ट कर दीं और लगभग १५ मिनट तक उसे उँगली से ही चोदा। उसकी चूत को खूब चाटा।
वह उउम्म्म्म्म.... आहहहहहहह ओओओह्ह्ह्हहहह, और चाटो! की आवाज़ निकाल रही थी। उसका पानी एक बार निकल गया। मैंने वो पूरा पी लिया। अब उसे भी मेरा लंड चूसने था। मेरा लंड साढ़े छः इंच का है। हम 69 की मुद्रा में आ गए। मैं उसकी चूत खा रहा था और वह मेरा लंड। इसी तरह २० मिनट के बाद वो मुझसे कहने लगी कि और मत तड़पाओ, मुझे जल्दी से चोट दो।
मैंने अपने लंड का सिरा उसकी चूत पर रखा, उसके पाँवों को पैला दिया और ज़ोर के धक्के के साथ लौड़ा अन्दर पेल दिया। वह चिल्लाई और तड़पने लगी। कहने लगी कि धीरे-धीरे करो, दर्द हो रहा है।
पर मैं कहाँ रुकने वाला था, मैं उसे चोदता चला गया। थोड़ी देर के बाद वह भी मस्त हो गई और गाँड हिला-हिला कर साथ देने लगी। उसके मुँह से ओओहहहह... आआआआहहहह... और ज़ोर से... हाएएएएए.... म्म्म्म्महह्हहहहह... आआआआआहहहहह की आवाज़ें निकलना रुक ही नहीं रहीं थीं। और अब मैं उसकी एक चूची को मसल रहा था और दूसरे को चूस रहा था। उसकी घुँडियों को काट रहा था। उसे चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही बह गया और मैं उसके ऊपर लेट गया।

Massage : मालिश - Erotic Desi Sex Story

Massage : मालिश - Erotic Desi Sex Story

दोस्तों मेरा नाम सुनील है, उमर २८ और लम्बाई ६ फ़ुट है । हमारा परिवार एक संयुक्त परिवार है। मैं आज आपको अपने जीवन की एक सच्ची घटना के बारे में बताने जा रहा हूँ। इसके बाद से तो मेरी जिन्दगी ही एक सेक्सी फ़िल्म जैसी हो गई। हमारे परिवार के सदस्य किसी की शादी में गए हुए थे और हमारे घर में कोई नहीं था। इस लिये मैं शाम को घर वापिस आ गया और पड़ोस वाली चाची के घर चला गया। मेरे चाचा फ़ौज में थे और कुछ दिन पहले ही छुट्टी बिताकर वापिस गए थे इसलिये मेरी चाची घर पे अकेली रहती थी। घर में वैसे तो उनके सास ससुर भी थे पर वो बात कहाँ थी कि जो उनके सुख दुःख बाँट सकें।
मेरी चाची की उमर २६ साल और लम्बाई ५'८" है और उनकी फ़ीगर ३६-३२-३६ की है उनकी शादी को सात साल बीत चुके थे. पर उन्हें औलाद का सुख नसीब नहीं हुआ था। आज भी वो बड़ी सेक्सी नज़र आती हैं। जब पहले भी कभी मैं और चाची घर में अकेले होते थे तो मैंने कई बार झुक कर काम करते समय उनकी गोरी-गोरी छाती देखी थी। उनके वो बड़े बड़े स्तन हमेशा ही मेरी आंखों के सामने घूमते रहते थे। मेरी माँ ने चाची को कह रखा था कि रात को हमारे घर पर सो जाना।
शाम को मैं चाची के घर चला गया। जब चाची घर का काम कर रही थी, उन्होंने काले रंग का सूट और सफेद सलवार पहना हुआ था। गरमी का मौसम होने के कारण उनके कपड़े पतले थे और उसमें से उनके अंदरूनी कपड़े ब्रा और चड्डी साफ़ नज़र आ रहे थे। मैं उस वक्त टीवी देख रहा था लेकिन मेरा पूरा ध्यान चाची की गांड और बड़े बड़े स्तनों पर था। रात को खाना खाकर मैं अपने घर आ गया। चाची ने कहा कि वो काम निपटा कर थोडी देर में आ रही है। मुझे देर तक टीवी देखने की आदत है इसलिये मैं करीब रात ९:३० तक टीवी देखता रहा।
तभी चाची आ गई। उसके बाद मैंने घर के सभी दरवाजे चेक करके बंद कर दिए। मैंने चाची का बिस्तर भी अपने कमरे में लगा दिया था। थोड़ी देर तक हमने टीवी देखा, फिर चाची मुझसे कहने लगी कि उसे नींद आ रही है और वो सो रही है।
मैंने कहा- ठीक है, तुम सो जाओ।
उसके बाद मैं करीब एक घंटा और टीवी देखता रहा। सोने से पहले जब मैं पेशाब करने के लिये जाने लगा तो मैंने देखा कि चाची अभी तक जाग रही है। मैंने पेशाब करके वापिस आ कर चाची से पूछा- क्या बात है, आपको नींद क्यों नहीं आ रही?
तो चाची ने बताया के उसके पेट में बड़ा दर्द हो रहा है। तो मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं उनकी कोई मदद कर सकता हूं तो उन्होंने कहा- प्लीज़ ! सरसों के तेल से मेरे पेट की थोड़ी मालिश कर दोगे?
तो मैंने कहा- ठीक है।
मैं सरसों का तेल लेकर आ गया। उन्होंने अपने पेट पर से कमीज ऊपर कर दिया, मैंने उनके पेट की मालिश करनी शुरु कर दी। मैं करीब ३० मिनट तक उनकी मालिश करता रहा। उसके बाद उनके पेट का दर्द कुछ ठीक हो गया पर अभी भी थोड़ा सा तेल बच गया था तो उन्होंने कहा कि इसे उनकी पीठ पर लगा दो।
चाची की पीठ से उनका कमीज ठीक से ऊपर नहीं हो रहा था तो चाची बोली- चलो मैं कमीज ही उतार देती हूं।
चाची कमीज उतार कर लेट गई और मैं उनकी लातों पर बैठ कर उनकी पीठ की मालिश करने लग गया। ऐसा करते समय मैंने कई बार अपना हाथ उनके स्तनों पे लगाया पर वो कुछ न बोली। फिर मालिश करने के बाद अपने बिस्तर में चला गया।
अभी मुझे लेटे हुए थोड़ा वक्त ही हुआ था कि चाची मेरी चारपाई के पास आ गई और मेरे ऊपर बैठ गई। मुझे पता नहीं चल रहा था कि मैं क्या करूं।
मैंने चाची से पूछा- आप यह क्या कर रही हो?
तो वो बोली- आज तूने मेरे स्तनों को हाथ लगा कर कई सालों से मेरे अंदर की सोई हुई औरत को जगा दिया है और अब इसकी गरमी को ठंडा भी तुम्हें ही करना पड़ेगा।
वो चाची जिसके साथ नंगा सोने के मैं सिर्फ़ सपने ही देखता था वो आज मेरे ऊपर बिना कमीज के बैठी हुई थी। मेरा सपना सच होने जा रहा था इस लिये मैं बहुत खुश था।
फिर मैंने और चाची ने अपना काम शुरु कर दिया। उसने अपने होंठ मेरे होंठों में डाल लिये और १० मिनट तक मुझे चूमती रही। पहले मैने अपनी जीभ चाची के मुंह में डाल दी और फिर उसने मेरे। फिर चाची ने अपनी सलवार उतार दी और अब उसने सिर्फ़ ब्रा और चड्डी ही पहनी हुई थी। फिर वो बिस्तर पर लेट गई और मैं उसके ऊपर।
फिर हम दोनों काफ़ी वक्त तक एक दूजे को चूमते रहे, कभी मैं उसकी छाती को चूमता, कभी उसके पेट को, तो कभी लातों को। फिर चाची ने अपनी ब्रा उतार दी और मैंने उनके बड़े बड़े बूब्स चूसने शुरु कर दिया। उसके चूचुक सख्त हो गए थे और चूची सख्त कठोर होती जा रही थी। मैं उन्हें मस्त होकर चूसे जा रहा था।
फिर चाची ने अपनी चड्डी भी उतार दी और मेरे साथ लेट गई। चाची की चूत बहुत बड़ी थी। मैंने उसको चाटना शुरु कर दिया। फिर ५-६ मिनट में चाची पहली बार झड़ गई। उसके बाद चाची ने मेरा बड़ा सा लंड अपने मुंह में डाल लिया और चूसने लग गई मैंने भी उनके मुंह में ही पिचकारी मार दी।
फिर चाची ने कहा- चलो अब असली काम करते हैं !
चाची टांगों को थोड़ा खोल कर सीधी लेट गई। मैंने ऊपर से अपना लंड चाची की चूत में डाल दिया, वो बहुत खुश थी क्योंकि आज बहुत वक्त बाद उसकी चूत में लंड घुसा था। मैंने लंड को आगे पीछे करना शुरु कर दिया। चाची ने भी आआअ ईए ऊऊह माआ हाआ हाअ की आवाज़ें निकालनी शुरु कर दी। मैं करीब तीस मिनट तक चाची की चूत चोदता रहा, इसमें चाची दो बार झड़ चुकी थी।
फिर मैंने चाची को कहा- मैं अब तुम्हें घोड़ी की तरह चोदना चाहता हूँ।
चाची घोड़ी बन गई, मैंने लंड को पीछे से उसकी चूत में घुसेड़ दिया। चाची की चूत पीछे से बड़ी तंग महसूस हो रही थी। उन्हें दर्द हुआ और वो चिल्ला दी- आऐईईईइईईईए माआआआआअ !
मैंने जोर जोर से लंड आगे पीछे करने शुरु कर दिया और १५ मिनट तक चाची को चोदता रहा। मैंने चाची जैसी गरम औरत की कभी नहीं ली थी। फिर मेरा छूट गया और मैं चाची को चूमने लग गया। थोड़ी देर में ही लंड फिर से सलामी देने लगा। फिर चाची ने बोला कि मैं एक बार फिर उनकी चूत मारूं !
इस बार वो मेरे ऊपर बैठ गई और अपने आप हिल हिल कर धक्के देने लगी। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। फिर मैंने उस सारी रात चाची की चार बार चूत मारी। चाची ने मुझसे सुबह कहा कि अब उनकी तमन्ना जरूर पूरी हो जायेगी।
इसके बाद जब भी हमें मौका मिलता, हम यह खेल खेलते रहे। कुछ महीने बाद चाची ने एक दिन मुझे बताया- मैं माँ बनने वाली हूँ और यह सब तुम्हारी ही बदौलत है कि मुझे माँ बनने का सुख मिला है पर मुझे डर है कि तुम कहीं ये सब किसी को कह न दो।
मैंने चाची को विश्वास दिलाया कि ऐसा कभी नहीं होगा और यह बात हमारे बीच ही रहेगी।
उस दिन से आज तक पता नहीं मैं कितनी ही ऐसे चाचियों और भाभियों को ये सुख दे चुका हूँ।

Hindi Sex Story : Didi Ki Raja : दीदी का राज़

Hindi Sex Story : Didi Ki Raja : दीदी का राज़

मेरा नाम शिखा है, उमर २२ साल, कद लम्बा, करीब ५ फ़ुट ३ इंच, रंग गोरा, बटाला और मैं अंग्रेज़ी से एम ए में पहले साल में हूँ और मेरी बहिन ऋचा उम्र २३ साल कद मुझ से थोड़ा छोटा ५ फ़ुट, मुझ से एक साल बड़ी है और वह मुंबई में कॉल सेण्टर में नौकरी करती है।
आज जो बात लिखने जा रही हूँ मुझ को बताते हुए बड़ी शर्म आ रही है।
बात आज से एक महीने पहले की है।
मेरी बहन एक महीने पहले ऑफिस से छुट्टी लेकर आई हुई थी। जब हम दोनों सो रहे थे तो दीदी के मोबाइल पर रात के करीब १०:३० बजे एक मिस्ड कॉल आई। तब दीदी ने कॉल देखी और उसी नंबर पर कॉल कर के बात करने लगी कि अभी तो मुझ को मासिक-धर्म ठीक से हुआ है अगर जरुरत पड़ी तो गोली ले लूँगी।
मैने पूछा- क्या बात है दीदी ऐसी बातें आप किस से कर रही हो?
दीदी- कुछ नहीं ! तू सो आराम से !
बस इतनी बात कर मैं भी सो गई।
अगले दिन हमारा चाचे का बेटा, नाम रोहन, उम्र २७ साल, कद ५ फुट ७ इंच, रंग सांवला अपनी नौकरी के सिलसिले में आया हुआ था। वह अब एक अच्छा डॉक्टर बन चुका था और एक सरकारी नौकरी पाने के लिए इंटरव्यू देने आया था। वह हम सबसे मिलने सुबह करीब ११ बजे आया।
नमस्ते ताया जी ! नमस्ते ताई जी ! क्या हाल है ? रोहन ने मम्मी पापा को बड़े जोश से पूछा।
बिलकुल ठीक है पुत्तर - दोनों ने कहा।
शिखा और ऋचा कहाँ पर हैं ?
मेरी मम्मी ने कहा- बेटा, अपने कमरे में होंगी, जा के देख ले, अच्छा बाकी सब बता, सब ठीक है? तेरी इंटरव्यू कैसी हुई? मैन्नू तेरी माँ दा फ़ोन आया सी, ताँ तो पता चला कि तू आ रहा है।
ओह ! ओह ! इतने सारे सवाल ! पहले शिखा और ऋचा से तो मिल लूं !
यह कहता हुआ रोहन हमारे कमरे में बिना दरवाज़ा खटकाए घुस आया।
मैं आगे खड़ी थी और वह एकदम से गले लग गया और जोर से उसने मेरे बूब्स को अपनी छाती साथ लगाया। एकदम से मेरे बदन में करंट दौड़ गया, मैंने एकदम से उसको अपने से पीछे हटाया- क्या कर रहे हो रोहन ?
ओह ! सॉरी मैं भूल गया था कि तुम जवान हो गई हो !
फिर वह दीदी के पास जाने लगा तो दीदी ने आगे बढ़ कर कर उस के गालों पर चूम लिया।
दीदी बोली- अब ठीक है !
रोहन बोला- मजा आ गया !
इतनी देर मैं मम्मी रोहन के लिए दूध ले कर आ गई।
रोहन बोला- क्या ताई ! यह उम्र क्या दूध पीने की है ? सेब खिलाओ, सेब !
सेब इन दिनों मैं कहाँ से लाऊँ ? मार्केट में बस केले ही मिल रहे हैं - मम्मी बोली रोहन से।
क्या ताई घर में ६ सेब मौजूद हों तो बाहर से खाने की क्या पड़ी है ? - रोहन बोला।
क्या मतलब ? मम्मी ने रोहन से बड़ी हैरानी से पूछा।
ताई दो सेब तो ताया जी चूसते हैं ! दो सेब आपने मुंबई भेज दिये और दो सेब यहाँ पर हैं वोह मुझ को दे दो !- रोहन मम्मी से बोला।
मुझ को तेरा मतलब समझ नहीं आया ? मम्मी ने रोहन को पूछा।
क्या ताई आप भी बड़ी भोली बनती हो?- रोहन आगे बढ़ा और मम्मी के ब्लाऊज़ के अन्दर देखने लगा।
क्योंकि मम्मी ने गहरे गले वाला ब्लाऊज़ पहन रखा था और जिसके अन्दर से मम्मी की ब्रा साफ़ साफ़ दिख रही थी और मम्मी के बूब्स आधे नंगे थे, क्योंकि हमारे घर में कोई लड़का नहीं था तो मम्मी ने भी कभी ऐसा ब्लाऊज़ न पहनने का न सोचा।
तभी मम्मी ने एकदम से ब्लाऊज़ को अपनी साड़ी के पल्लू से ढाका- चल हट ! शरारती कहीं का ! मम्मी ने थोड़ा हंस के और थोड़ा शरमा कर उसको पीछे किया।
तब सारे हँस दिए और बात को ख़त्म कर दिया गया। मगर सच बात यह थी कि उस वक़्त मुझ को रोहन की बात समझ नहीं आई थी, बाकियों को हँसता हुआ देख मैं भी हँस दी, मगर मेरे मन में बात चलती रही कि बात क्या हुई।
इस तरह से एक हफ्ता बीत गया।
फिर उसी तरह से दीदी को रात को करीब १०:३० बजे कॉल आई।
अब ठीक है ! परेशानी की कोई बात नहीं - दीदी ने कहा और फ़ोन काट दिया।
मैंने फिर दीदी से पूछा- क्या बात है?
मगर दीदी ने फिर वही जवाब दिया कि तुम सो जाओ !
मगर मैं सोती कैसे ! मेरे मन में बेचैनी थी कि पता नहीं बात क्या है !
सो मैने भी ठान ली कि आज बात जान कर ही रहूंगी ! मेरे सोचते सोचते २० मिनट निकल गए।
तब मैंने देखा कि दीदी उठी, तब शायद रात के १२:१५ बजे ही थे, कमरे में अँधेरा था, अंधेरे में ही दीदी ने मुझको टटोला कि क्या मैं अच्छी तरह से सो गई हूँ। मगर मैं सोई नहीं थी, मैने तो सिर्फ अपनी आँखें बंद कर रखी थी।
मैंने ध्यान से देखा की दीदी ने तब अपनी नाईटी उतार दी और फिर अपनी ब्रा और पैंटी भी उतार दी। अब वह पूरी तरह से नंगी थी और फिर उसने हमारे कमरे को अन्दर से लॉक कर दिया, फिर वह हमारे बेड पर आ गई, फिर उसने अपना मोबाइल उठाया और कुछ देखने लग गई।
मोबाइल की रोशनी से दिख रहा था कि दीदी पूरी तरह से नंगी हुई हुई थी, यह देख मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मगर उठती कैसे, क्योंकि मैंने दीदी को इस अवस्था में पहली बार देखा था। दीदी ने अपना मुँह मेरे से उल्टी तरफ किया और अब दीदी की नंगी पीठ मेरी तरफ थी। मेरे मन में उत्तेज़ना थी कि क्या हो रहा है !
तब मैने बड़ी मुश्किल से हिम्मत जुटाई और देखा कि मोबाइल में क्या चल रहा है !
वह देख मैं तो दंग रह गई- मोबाइल में लड़कों और लड़कियों की नंगी तस्वीरें थी। तब दीदी की नज़र मुझ पर पड़ी और एकदम से घबरा गई। फिर हम दोनों में १ मिनट की चुप्पी छाई रही और फिर दीदी एकदम से मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरे नाईट-गाऊन के सारे बटन खोल दिए। दीदी जानती थी कि मैं रात को ब्रा और पैंटी नहीं पहनती क्योंकि मुझ को रात को इससे बड़ा आराम मिलता है।
अब मैं और मेरी दीदी पूरी तरह से नंगे थे और दीदी मेरे ऊपर थी। मुझे बहुत अजीब सा और अच्छा भी लग रहा था।
फिर दीदी ने मेरे बाएँ स्तन को चूसना शुरू किया।
ओह ! मैंने कहा- दीदी यह क्या कर रही हो?
क्यों मजा नहीं आ रहा ? दीदी ने मुझ से पूछा।
अब मैं उसको ना , ना कह सकी ! असल में मजा तो आ रहा था। मैं चुप रही।
फिर क्या था, उसने अपने होंट मेरे होंटों पर रख दिए और चूसने लगी।
बहुत मजा आ रहा था। दीदी ने फिर मेरे बूब्स को चाटा, फिर उनको चूसा !
फिर मेरे पेट को अपनी जीभ से साफ़ किया, फिर वह नीचे बढ़ी और मेरी घुटनों से पकड़ कर मेरी टाँगें खोल दी।
यह क्या ? बड़े बाल हैं साफ़ नहीं करती क्या ? उफ़ ! - दीदी ने कहा।
"सारा मजा खराब कर दिया !" फिर से कहा दीदी ने !
फिर दीदी रुकी और मेरे साइड पर बैठ गई और बोली, " यार तेरे सेब बहुत मीठे हैं, तुझको मेरे कैसे लगे ?
मैंने उसको बड़ी हरानी से देखा," अरे ! तेरे बूब्स तेरे सेब हैं ! रोहन इन सेबों की बात कर रहा था ! अरे यार, मम्मी के सेब रोज पापा चूसते हैं। इस उम्र में तुझको पता होना चाहिये। इस लिए तो रोज उन को कमरा बंद होता है। और तू फ़ोन कॉल की बात पूछ रही थी तो सुन मेरे से एक गलती हो गई, मैं भी अपने सेब चुसवा चुकी हूँ !"
यह कह कर उस ने मेरी तरफ देखा- हां, मैं जानती हूँ कि तुझ को यह बात सुन कर अजीब लग रहा होगा, मगर मैं सच कहूं तो मैं यह करना नहीं चाहती थी, बस हो गया ! दीदी ने कहा।
मगर हुआ कैसे ? मैने पूछा।
"मेरे ऑफिस में एक मेरा दोस्त है सुमित, मुझ को काफी अच्छा लगता है, फिर हम दोनों में दोस्ती हो गई।
फिर इक दिन १४ फरवरी को उसने मुझ को काफ़ी पीने के लिए आमंत्रित किया। हम एक रेस्तरां में चले गए। वहाँ पर जा के देखा कि वह अपना पर्स घर पर भूल आया है। मैने पैसे देने के लिए कहा, मगर वह माना नहीं इसलिए वह मुझ को पर्स लाने के बहाने से अपनी घर ले गया।
मगर जब घर के अन्दर गई तो पता लगा कि वह अकेला है। यह देख मुझको घबराहट हुई, उसने कहा कि घबराओ मत ! यह कह कर वह मुझको अपने कमरे में ले गया और कहा कि वह मेरे लिए पीने के लिए पानी लाता है। वह बाहर गया तब मैं कमरे में अकेली थी।
मैंने देखा कि उसके बेड पर नंगी तस्वीरों वाली मैगजीन थी। अभी मैं उसको देख ही रही थी कि वह पीछे से आ गया !" दीदी ने कहा।
फिर क्या हुआ ? मैंने दीदी से पूछा।
फिर क्या ? फिर उसने मुँह से सीधा-सीधा पूछ लिया,"क्या तुम मेरे साथ सेक्स करोगी? मैं वायदा करता हूँ कि यह बात मैं किसी से नहीं कहूंगा और तुमसे ही शादी करूंगा।"- दीदी ने कहा।
फिर ? उस के बाद क्या हुआ दीदी ?- मैंने पूछा।
सच कहूं तो उस वक्त तो मैं पूरी तरह से गरम थी और मैं उसके साथ सेक्स करना चाहती थी। मैंने उसको कुछ ना कहा मगर वह मेरे मन की बात समझ गया। तब मैंने उसके साथ सेक्स किया... वाह ! ...... कितना मज़ा था उसमें ! ... क्या आग थी !"
"अब मुझको यह तो नहीं पता कि वही तेरा जीजू बनता है या नहीं ! लेकिन मुझसे गलती तो हुई है !" दीदी ने कहा।
चल छोड़ उसको हम अपना मजा करते हैं - फिर से दीदी ने कहा।
फिर वह उठी, मेरे ऊपर पहले चद्दर दी और मुझ को इन्तज़ार करने के लिए कहा। फिर दीदी ने मेरा नाईट गाऊन पहना और फ़्रिज से बर्फ ले आई और कमरा बंद कर फिर से पूरी नंगी हो गई और मेरी चद्दर भी उतार दी।
अब हम दोनों फिर से नंगे थे !
फिर दीदी ने मेरी टाँगें खोली और मेरे चूत पर बर्फ मली।
उफ़ ! मैंने कहा।
क्या हुआ ? दीदी ने पूछा।
कुछ नहीं ! अच्छा लगा ! मैंने कहा और मैं हंस पड़ी।
मेरी बहन जवान हो गई है ! अगर मन करे तो अपनी सेब रोहन से चुसवा लियो ! अच्छा लड़का है ! दीदी ने कहा।
फिर हमने काफ़ी मस्ती की और कपड़े पहन कर सो गए।
मैं आज भी उस दिन को नहीं भूल पाई जिस दिन दीदी ने मुझ को अपना राज बताया और मुझ को भी बड़ा मजा दिया।
मैं यह मजा फिर से लेना चाहती हूँ।
आजकल रोहन बहुत याद आता है।

Erotic Hindi Sex Story :Pyaasa Dil - प्यासा दिल

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Erotic Hindi Sex Story : रात - Night

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Indian couple sex story in Hindi : मेरी भाभी

Indian couple sex story in Hindi : मेरी भाभी

अब मैं अपनी कहानी शुरू करता हूँ ! हाँ कहानी पढ़ने के बाद मुझे मेल जरूर करना........!
बात करीब पाँच साल पहले की है जब हमारे घर के पास एक भैया रहने आये जिनका नाम सुनील और २२ साल के थे। वो अभी शादीशुदा नहीं थे उनकी न तो सेहत थी न लम्बाई !
मैं सोचता कि कौन सी लड़की इनसे शादी करेगी .. !
मैं सोलह साल का होता हुआ भी उनसे अच्छा दीखता था। पर स्वभाव उनका बहुत अच्छा था। हम दोनों जल्दी अच्छे दोस्त बन गए। वो मुझ से हर बात शेयर करने लगे। फिर मैंने उनसे पूछा- आपने कभी किसी लड़की को चोदा है?
तो बोले- नहीं !
फिर बात आई गई हो गई। २ साल बाद मुझे पता चला कि उनके घर वालो ने उनके लिए एक लड़की देख ली है, बस भैया को जा कर पसंद करनी है।
वो मुझे भी साथ ले गए। मैं था तो अट्ठारह का पर लग रहा था पूरा नौजवान बीस साल का ....
जब हम लोग लड़की वालों के पहुँचे तो सबने मुझे लड़का समझा।
तो मैंने उन्हें कहा- मैं नहीं, ये हैं जो आपकी लड़की से शादी करना चाहता है !
उन्हें ये पता लगते ही लगा कि वो भैया के साथ अपनी बेटी की शादी नहीं करना चाहते।
पर उनकी कुछ मज़बूरी थी जिस कारण वो कुछ नहीं बोल पाए ......
जैसे ही लड़की आई, हम दोनों उ़से ही देखते रहे- क्या तो लग रही थी ! बिल्कुल परी जैसी थी !
मैं तो बार बार उसके स्तनों और गांड को ही देख रहा था। मुझे तो उसी समय उसे चोदने का मन करने लगा पर मैं शांत ही रहा।
भैया ने शादी के लिए हाँ कह दी।
४० दिन बाद का मुहूर्त निकला शादी का ......
मैं तो दिन-रात मुस्कान ( भैया की होने वाली बीबी ) के बारे में ही सोचता रहता ...... तब मुझे मूठ मरना नहीं आता था .....
शादी वाला दिन भी आ ही गया। मैंने अपने लिए नए कपड़े लिए तो जिसे देख भैया बोल उठे- आज तो तू ही दूल्हा लग रहा है..!
मैं भी हंस दिया।
बारात चलने लगी मैंने बारात में खूब डांस किया .... फिर करीब डेढ़ घंटे बाद हम शादी वाली जगह पहुँच गए .....
शादी में हमने बहुत मस्ती की और भैया की साली जो मेरे बराबर थी के साथ बहुत मजे किये। बहुत बार उसकी गांड और बूब्स को दबा देता पर वो कुछ नहीं बोली...
शादी अच्छी तरह हो गई।
मुझे तो भाभी और उनकी बहन दोनों को चोदने की इच्छा होने लगी।
लेकिन दो महीने बाद मेरे एग्ज़ाम थे तो मैं उनकी तैयारी में लग गया। कभी कभी भैया के घर जाने लगा .....
एग्ज़ाम खत्म होते ही मैं भैया के घर ही दिन भर बिताता ...
मुझे भाभी कभी खुश नहीं लगी। मैंने कई बार पूछा, पर वो कुछ नहीं बोली। मैंने भैया को भी बोला कि क्या बात है !
तो भी बोले- कुछ नहीं ! लड़कियों की आदत ही होती है गुमसुम रहने की !
फिर मैंने भी कुछ नहीं कहा ....
२ महीने बाद मैं ऐसे ही रोज की तरह भैया के घर गया .... उनका गेट जो अक्सर बंद ही रहता है, आज खुला था। मैं सीधे अन्दर घुस गया।
सामने का नज़ारा देख कर मैं दंग रह गया।
भाभी ब्लू फिल्म देख रही थी जिसमें आदमी लड़की की चूत में अपनी ऊँगली डाल रहा था, भाभी भी अपनी चूत में ऊँगली डाल रही थी ...
मैं जाने लगा तो भाभी ने देख लिया और जल्दी से कपड़े ठीक कर बोली- रोहित तुम कब आये?
मैं कुछ नहीं बोला और उनकी चूत की तरफ देखने लगा तो वो बोली- क्या देख रहे हो?
मैं बोला- कुछ नहीं ....!
तो एकदम से बोली- मेरी चूत की तरफ ना !
मैंने कहा- हाँ !
तो बोली- मुझे चोदोगे ?
मैं बोला- क्या????
तो बोली- तुम्हारे भैया तो नामर्द हैं, कभी लंड ही खड़ा नहीं होता। शादी के ९ महीने बाद भी मैं अक्षत-योनि हूँ.....!
मैं बोला- क्या????
वो बोली- प्लीज़ ! मेरी चूत की प्यास मिटाओ !
मैं अटकता अटकता बोला- ठीईई ठीई ठीक है ! चोदता हूँ ! पर भैया को पता चला तो ?
वो बोली- कुछ नहीं बोलेगा वो भैन का लौड़ाऽऽऽ !
मैं मन मन बहुत खुश हुआ, मेरी पहली चुदाई 18 साल की उम्र में ! मज़ा आ जायेगा ...........!
फिर मैं भाभी को उठा कर बेड पर ले गया और उनके स्तन ब्लाऊज़ के ऊपर से ही दबाने लगा।
वो आहें भरने लगी.........अह्ह्ह्ह् ह्ह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह मज़ा आ गया ! तेज़ दबाओ जान्न्न् ..........
मैं और तेज़ दबाने लगा, उसके बूब्स को उसकी ब्रा से आजाद कर के दबाने लगा वो और तेज़ आहे भरने लगी.........अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह या आआआअह्ह्ह्ह्ह उह्ह्हुहुहू अहः
फिर मैं बूब्स को मुँह में चूमने लगा ...........
फिर उनकी साड़ी हटा कर पूरा नंगा करने लगा ....... और उसके बदन पर हाथ फेरने लगा।
वो बोली- जान ! बड़ा मज़ा आ रहा है............
मैंने उसे पूरा नंगा कर दिया, बस पैंटी नहीं खोली और बोला- मेरा लंड तो बाहर निकालो और तरोताजा करो...........!
तो बोली- अभी निकलती हूँ.....
२ मिनट में मुझे पूरा नंगा कर के मेरे ७.५ इंच के मोटे लंड से खेलने लगी...........
मुझे भी काफी मज़ा आ रहा था..... मैं भी आहें भरने लगा..
मेरे लंड ने एक बार करीब २० मिनट बाद पानी छोड़ दिया....
फिर मैं उसकी चूत को पैंटी हटा कर नंगा करने लगा। क्या तो मस्त चूत थी उसकी ..........छोटे छोटे बाल और गुलाबी रंग की....
मैं उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा तो वो आहें भरने लगी- आ आआ आह्ह ऊऊओह्ह्ह्ह माज्ज़ा आआआ राह्हा है जानी.........
मैं बोला- अभी तो असली मज़ा आना बाकी है मेरी जान ......... मैं ऊँगली से उसकी चूत को खोलने लगा....
तो वो चिल्लाई- आह्ह्ह दर्द हो रहा है !
तो मैं बोला- फिर मेरा मोटा लंड घुसने पर क्या होगा मेरी जान.....?
कुछ देर बाद बोली- अब सब्र नहीं होता ! चोदो मेरी चूत को.......
तो मैंने उसे बेड पर लेटा कर धीरे धीरे उसकी अनछुई चूत में लंड डालने लगा। मुझे पता था कि दर्द होगा, सो मैंने आराम से घुसाना जारी रखा.......
उसे थोड़ा दर्द हुआ पर इतना नहीं जितना आमतौर पर लड़कियों को पहली चुदाई में होता है।
थोड़ी देर बाद मैं स्पीड बढ़ाता गया ..... अब उसे भी मज़ा आ रहा था, बोलने लगी- रोहित जान, और तेज्ज़ फाड़ दे मेरी चूत ......
मैं और तेज़ हो गया और उसकी चूत को मज़े देने लगा....
उसकी चूत को चोदते हुए इतना मज़ा आ रहा था कि मुझे लगा कि मैं हमेशा ऐसे जीवन भर चोदता रहूँ...
१५ मिनट बाद वो झड़ गई और बोलने लगी- अब प्लीज़ ! रुक जाओ !
पर मैं कहाँ रुकने वाला था, मैं अपनी स्पीड पर उसे चोदता रहा...........
दस मिनट बाद मैं भी झड़ गया और सारा पानी उसकी चूत में छोड़ दिया.............
वो बोली- जान आज तो मुझे मज़ा आ गया !
मैं बोला- जान ! तुमने मुझे जो मज़ा दिया उसे मैं कभी नहीं भूलूंगा....
उस दिन हमने करीब ५ बार चुदाई की।
अब हम रोज चुदाई करने लगे। मैंने ही उसे बच्चा दिया।
मैंने मुस्कान की छोटी बहन की मीनाक्षी को भी खूब चोदा ......
पर यह कहानी बाद में !

HIndi Sex Story : एक शाम बरसात के नाम

Erotic HIndi Sex Story : एक शाम बरसात के नाम

हम लोग जहां रहते हैं वो एक पुराना मुहल्ला है। पुराने टाईप के घर है, आपस में लगे हुए। लगभग सभी की छतें एक दूसरे से ऐसे लगी हुई थी कि कोई भी दूसरे की छत पर आ जा सकता था। मेरे पड़ोस में कॉलेज के तीन छात्रों ने एक कमरा ले रखा था। तीनों ही शाम को छत पर मेरे से बातें करते थे, हंसी मजाक भी करते थे। उन तीनों लड़कों को देख कर मेरा मन भी ललचा जाता था कि काश ये मुझे चोदते और मैं खूब मजे करती। कभी कभी तो उनके सपने तक भी आते थे कि वो मुझे चोद रहे हैं। कभी कभी मौसम अच्छा होने पर वो शराब भी पी लेते थे, मुझे भी बुलाते थे चखने के लिये ... पर मैं टाल जाती थी।
मेरे पति धन्धे के सिलसिले में अधिकतर मुम्बई में ही रहते थे। घर पर सास और ससुर जी ही थे। दोनों गठिया के रोगी थे सो नीचे ही रहा करते थे। आज मौसम बरसात जैसा हो रहा था। मैंने एक बिस्तर जिस पर मैं और मेरे पति चुदाई किया करते थे, उसे बरसात में धोने के लिये छत पर ले आई थी। उस पर लगा हुआ वीर्य, पेशाब के दाग, क्रीम, और चिकनाई जो हम चुदाई के समय काम में लाते थे, उसके दाग थे, वो सभी मैं बरसात के पानी से धो देती थी। ऊपर ठण्डी हवा चल रही थी। शाम ढल चुकी थी। अन्धेरा सा छा गया था।
ठण्डी हवा लेने के लिये मैंने अपनी ब्रा खोल कर निकाल दी और नीचे से पेन्टी भी उतार दी। अब चूत में और चूंचियो में वरन सारे शरीर में ठण्डी हवा लग रही थी। दूसरी छत पर तीनों लड़के बण्टी, नीटू और चीकू दरी पर बैठे हुये शराब की चुस्कियाँ ले रहे थे।
"अरे कामिनी दीदी आओ, देखो कितना सुहाना मौसम हो रहा है !" बण्टी ने मुझे पुकारा।
"नहीं बस, मजे करो तुम लोग, चीकू, बधाई हो, 80 पर्सेन्ट नम्बर आये हैं ना !" मैंने चीकू को बधाई दी।
"दीदी आओ ना, मिठाई तो खा लो !" चीकू ने विनती की।
मैं मना नहीं कर पाई और उनके पास चली आई। मिठाई थोड़ी सी थी जो उन्होंने मुझे दे दी। मैं मिठाई खाने को ज्योंही झुकी मेरे बोबे उन्हें नजर आ गये। अब वो तीनों जानबूझ कर मेरी चूंचियां झांक कर देखने कोशिश करने लगे। मैंने तुरंत भांप लिया कि वो क्या कर रहे हैं। पर मौसम ऐसा नशीला था कि मेरा मन मैला हो उठा। उन तीनों के लण्ड के उठान पर मेरी नजर पड़ गई। उनके पजामे तम्बू की तरह धीरे धीरे उठने लगे। मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था।
"दीदी, हमारे बीच में आ जाओ और बस चीकू के नाम एक पेग !"
मैंने इसे शुरुआत समझी और बण्टी और चीकू के बीच में बैठ गई। इसी बीच चीकू ने मेरे चूतड़ पर हाथ फ़ेर दिया। मैंने उसे जान करके ध्यान नहीं दिया। पर एक झुरझुरी आ गई।
"लो दीदी, एक सिप ... "
"नहीं पहले मैं दूंगा ... ।"
दोनों पहल करने लगे और उनका जाम छलक गया और मेरे कपड़ो पर गिर गया। चीकू ने तुरन्त अपना रुमाल लेकर मेरी छाती पोंछने लगा। बन्टी कहां पीछे रहने वाला था, उसने भी हाथ मार ही दिया और मेरी चूंचिया दब गई। मेरे मुख से हाय निकल गई।
मैंने भी मौका जानकर अपना हाथ चीकू के लण्ड पर रख दिया और दबाते हुई बोली," अरे बस करो, मैं साफ़ कर लूंगी ... " और उसका लण्ड छोड़ दिया। तभी बारिश होने लगी। चीकू समझ नहीं पाया कि लण्ड को जानकर के पकड़ा था या नहीं।
"चलो चलो अन्दर आ जाओ ... ।" चीकू ने कहा।
हम काफ़ी भीग चुके थे, मेरा ब्लाऊज भी चूंचियो से चिपक गया था। सफ़ेद पेटीकोट भी चिपक कर पूरा गाण्ड का नक्शा दर्शा रहा था। पर मेरे मन में तो आग लग चुकी थी, बरसात भली लग रही थी। जैसे ही मैं खड़ी हुई तीनों मुझे बेशर्मी से घूरने लगे। मैं दीवार को लांघ कर अपनी छत पर आ गई और झुक कर बिस्तर धोने लगी। मैंने देखा कि तीनों अन्दर जा चुके थे। अन्दर की आग धधक उठी थी। हाथ से चूत दबा ली और मुख से हाय निकल पड़ी। मैं ब्लाऊज के ऊपर से ही अपनी चूंचियाँ मलने लगी। मेरा पेटीकोट पानी के कारण चिपक गया था। बरसात तेज होती जा रही थी। मेरा बदन जल रहा था। ठन्डा पानी मुझे मस्त किये दे रहा था।
इतने में मुझे लगा कि दीवार कूद कर कोई आया, देखा तो चीकू था।
"दीदी मैं धोने में मदद कर देता हूँ ...! " और बिस्तर धोने लगा। अन्धेरे का फ़ायदा उठा कर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
"अरे छोड़ ना ... " पर उसने मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया, और एक कोने में आ गया।
"दीदी, तुम कितनी अच्छी हो, बस एक किस और दे दो ... " मुझ पर अपने शरीर का बोझ डालते हुए चिपकने लगा। मैं कांप उठी, जिस्म कुछ करने को मचल उठा। इतने जवान लड़के को मैं छोड़ना नहीं चाह रही थी। मेरे होंठ थरथरा उठे, वो आगे बढ़ आया ... उसके होंठ मेरे होंठो से चिपकने लगे। अचानक ही चीकू ने मेरे जिस्म को भींच लिया। मेरे बोबे उसकी छाती से दब कर मीठी टीस से भर उठे। उसके लण्ड का स्पर्श मेरी चूत के निकट होने लगा। मैंने भी अपनी चूत उसके लण्ड पर सेट करने लगी, और अब लण्ड मेरे बीचोबीच चूत की दरार पर लगने लगा था।
"चीकू, बस अब हो गया ना ... चल हट !" बड़े बेमन से मैंने कहा। पर जवाब में उसने मेरे बोबे भींच लिये और मेरा ब्लाऊज खींच लिया। उसने मेरे बोबे दबा कर घुमा दिये।
"दीदी, ये मस्त कबूतर ! इनकी गरदन तो मरोड़ने दो ...! " मेरे मुख से हाय निकल पड़ी, एक सीत्कार भर कर उसका लण्ड पकड़ कर खींच लिया।
"चीकू, ये मस्त केला तो खिला दे मुझे ... अब खुजली होने लगी है !" मेरे मुख से निकल पड़ा और चीकू ने मेरा पेटीकोट उठा दिया। उसने अपना पजामा भी उतार दिया। मुझे उसने धक्का दे कर गीले बिस्तर पर लेटा दिया और भीगता हुआ मेरी चूत के पास बैठ गया। मैंने अपनी दोनों बाहें खोल दी।
"आजा ... चीकू ... हाय जल्दी से आजा ...! " उसने उछल कर अपनी पोजीशन ली और दोनों हाथ से मेरे बोबे भींच लिये और लण्ड को भीगती हुई चूत पर रख दिया और मेरे ऊपर लेट गया।
"लगा ना ... अब प्लीज ... अब मजा दे दे ... " मैंने उसे चोदने का निमन्त्रण दिया और मेरे बदन में ठण्डे पानी के बीच उसका गरम लौड़ा मेरे जिस्म में समाने लगा। मैं भी चूत ऊपर की ओर दबा कर पूरा लण्ड घुसेड़ने की कोशिश करने लगी ... हाय रे ... अन्दर तक बैठ गया। मन में आग पैदा होने लगी। जिस्म जलने लगा। बारिश आग लगाने लगी। हम दोनों जल उठे, गीला बदन ... लण्ड पूरा अन्दर तक चूत की मालिश करता हुआ ... मस्त करता हुआ ... जिस्म एक दूसरे में समाने लगे। दोनों नंगे ... उभारों को दबाते और मसलते हुए मस्त हो गये। धक्के और तेज हो गये ...
"मजा आ गया बारिश का, चोद रे ... जी भर के लगा लौड़ा ... आज तो फ़ाड़ दे मेरी ... "
"हां दीदी, तेरी तो मस्त चूत है ... गीली और चिकनी !"
"हाय रे तेरे टट्टे, मेरी गाण्ड को थपथपा रहे है ... कितना सुहाना लग रहा है ... !"
"चुद ले, जोर से चुद ले ... फिर पता नहीं मौका आये या ना आये ... " जोश में उसकी कमर इंजन की तरह चलने लगी। मैं चुदती रही ... मन की हसरतें निकलती गई ... मैं चरम बिन्दु पर पहुंचने लगी ... जिस्म में कसावट आने लगी। लग रहा था कि सारा खून और सारा रस खिंच कर चूत की तरफ़ आ रहा हो ...
"आईईई ... मर गई ... हाऽऽऽऽऽय मेरी मां ... चोद दे जोर से ... लगा लौड़ा ... सीस्स्स्स्स्स्सीईईईऽऽऽऽ ... मेरी चूत रे ... " और सारा रस चूत के रास्ते बाहर छलक पड़ा। मैं झड़ने लगी थी। उसका लण्ड चलता रहा और मैं निढाल हो कर पांव फ़ैला कर चित लेट गई। बरसात का पानी मुझे ठण्डा करने लगा। चीकू ने अपना लण्ड बाहर खींच लिया और मुठ मारने लगा और एक जोर से पिचकारी छोड़ दी ... मेरे पेट पर एक बरसात और होने लगी ... रुक रुक कर ... चिकने पानी की बरसात ... और आकाश वाले बरसात के पानी से सभी कुछ धुल गया। बरसात अभी भी तेज थी। चीकू अब उठ खड़ा हुआ। उसका लौड़ा नीचे लटकता हुआ झूल रहा था। मैंने अपनी आंखें बरसात की तेज बूंदों के कारण बन्द कर ली।
अचानक मुझे लगा कि मेरे बदन को किसी ने खींच लिया। दूसरे ही पल एक कड़क लण्ड मेरी गाण्ड से चिपक गया।
"दीदी, प्लीज ... करने दो ... " इतने में एक और कड़क लण्ड मेरे मुँह से रगड़ खाने लगा और मैंने उसे मुंह में भर लिया।
"दीदी चूस लो मेरे लण्ड को ... " ये बण्टी की आवाज थी। ऊपर वाले ने मेरी सुन ली थी। तीनों अपना कड़क लण्ड लिये मेरी सेवा में हाज़िर थे। चीकू फिर से तैयार था, उसका लण्ड कड़क हो चुका था। चीकू मेरी गाण्ड चोदने वाला था।
"हाय ... चीकू धीरे से ... " चीकू का लण्ड गाण्ड के फूल को छू चुका था। मेरी गाण्ड लपलपाने लगी थी। बरसात से गांड का फूल चिकना हो रहा था।
"दीदी घुसेड़ दू लण्ड ...? " चीकू फूल को दबाये जा रहा था। छेद कब तक सहता उसने अपने पट खोल दिये और लण्ड गाण्ड में घुस गया।
"आ जा नीटू, मेरी छाती से लग जा ... " नीटू को मैंने छाती से दबा लिया और उसका लण्ड अपनी चूत पर रख दिया। मेरी चूत फिर से पानी छोड़ रही थी। मैंने अपनी टांगे खोल कर नीटू पर रख दी। लण्ड को खुला रास्ता मिल गया और चूत में उतरता चला गया।
मैंने चीकू से कहा," लण्ड निकाल और मेरी पीठ पर आ जा। मैंने नीटू को लण्ड समेत अपने नीचे दबा लिया और लण्ड पूरा चूत में घुसा लिया। चीकू ने पीछे से आकर मेरे चूतड़ों की फ़ांको को चीर कर फिर से छेद में लण्ड घुसेड़ दिया। बण्टी ने फिर से अपना लण्ड मेरे मुख में घुसा डाला।
"आह ... मजा आ गया ... अब चलो, चोद दो मुझे ... लगाओ यार ... पेल डालो !" मुझे मस्ती आने लगी। आज तो तीन तीन लण्ड का मजा आ रहा था। मौसम भी मार रहा था ... बरसात की तेज बौछार ... वासना की आग को और तेज करने लगी थी। बन्टी ने तभी मुँह से लौड़ा निकाला और मेरे चेहरे पर पेशाब करने लगा।
"पी ले दीदी ... पी ले ... मजा आ जायेगा !" मैंने अपना मुँह खोल दिया और पेशाब की तेज पिचकारी आधी मुँह में और आधी चेहरे पर आ रही थी। नमकीन पेशाब मस्त लग रहा था। नीटू और चीकू चोदने लगे थे। जोरदर धक्के मार रहे थे। मैं भी अपनी कमर हिला हिला कर मस्त हुई जा रही थी।
"दीदी कितनी टाईट है आपकी गाण्ड ... मैं तो गया हाय !" और चीकू हांफ़ता हुआ झड़ने लगा। लण्ड बाहर निकाल कर वीर्य को बरसात में धो दिया और मेरी पीठ पर पेशाब करने लगा।
"दीदी मैं भी आया ... " और बण्टी ने भी पिचकारी छोड़ दी।
मैं भी अब अपने दोनों पांव खोल कर बैठ गई।
"आ जाओ मेरे जिगरी ... किस को मेरा पेशाब पीना है और मैंने अपनी पेशाब की धार निकालनी चालू कर दी। बण्टी तुरन्त मेरे आगे लेट गया और मेरे पेशाब को अपने मुंह में भरने लगा। चीकू को मैंने खींच कर बाल पकड़ कर चूत से चिपका लिया और धार अब उसके होंठों को तर कर रही थी ... गट गट करके दो घूंट वो पी गया ... नीटू जब तक इन दोनों को धक्का देता ... मेरा पेशाब पूरा निकल चुका था। पर उसने छोड़ा नहीं, अपना मुंह मेरी चूत से चिपका कर अन्दर तक चाट लिया। मुझे चीकू ने पास में खींच कर मुझे लेटा लिया ... अब हम चारों एक ही बिस्तर पर आड़े तिरछे लेटे हुये, तेज बरसात की बौछारों का मजा ले रहे थे ... । बहुत ही मजा आ रहा था। बरसात और फिर तीन जवान लण्डो से चुदाई। मन में शांति हो गई थी।
बरसात की बूंदें बोबे पर और उन जवान लौड़ो पर गिर रही थी। ठंडी हवा शरीर को सहलाने लगी थी। इच्छायें फिर जागने लगी। बरसात फिर शरीर में चिन्गारियाँ भरने लगी ... और एक बार और वासना उमड़ पड़ी। सोये हुए शेर फिर जाग उठे ... । उनके तने हुए लण्ड देख कर मैं एक बार फिर तड़प उठी। लाल लाल लौड़ों ने फिर खाई में छ्लांग लगा दी ... और सीत्कारें निकल उठी। इस बार सभी का निशाना मेरी प्यारी गाण्ड थी। एक के बाद एक तीनों लण्डों ने मेरी खूब गाण्ड मारी ... और मैं मजा लूटती रही ... ।

Mera Bulbul : मेरा बुलबुल

Mera Bulbul : मेरा बुलबुल

मेरा नाम मनीष है, मैं दिल्ली मैं नौकरी करता हूँ। मेरी उम्र २४ वर्ष है, यानि कि जवान हूँ। मैं अपने बारे में कुछ बता देना चाहता हूँ। मैं सेक्सी दिखता हूँ, ग़लती से या सही से, भगवान ने मुझ ग़रीब को अच्छे व्यक्तित्व का मालिक बनाया है। मेरा क़द ५.७ फीट है, देखने में कोई बॉडी-बिल्डर तो नहीं पर एक अच्छे बद़न का मालिक ज़रूर हूँ। मैं अन्तर्वासना में प्रकाशित हुई लगभग सारी कहानियाँ पढ़ता रहता हूँ। यह साईट मुझे काफ़ी अच्छी लगती है। आज मैं भी आप लोगों को अपनी आपबीती में शामिल करता हूँ।

बात तब की है जब मैं अपने चाचा-चाची और भाई-भाभी के पास रहने और नौकरी तलाश करने के लिए दिल्ली आया था। उस समय मेरे चाचा के घर में किरायेदार के रूप में मेरे ही गाँव का एक परिवार रहता था। उस परिवार में एक लड़की बुलबुल, जिसकी उम्र १८ वर्ष है और दूसरी उसकी छोटी बहन जो १० साल की है और उनके एक छोटा भाई है जिसका नाम अमित है और वह ६ साल का है।

बात बुलबुल की है, जो मुझसे प्यार करती थी, और मुझे पता भी नहीं था, पर एक दिन क्या हुआ... यह आप ख़ुद ही जान जाएँगे।

जब मैं रहने के लिए वहाँ गया था, तो शुरू-शुरू में तो वह मुझसे बात भी नहीं करती थी, सोचती थी मैं पहल करूँ। पर मैं तो ठहरा गाँव का आदमी, भला कहाँ से पहल करूँ? वैसे तो मुझे गाँव में काफी अवसर मिले पर मैं एक बार भी कर नहीं पाया क्योंकि डर रहता था कि अगर मैं कुछ ग़लत करता हूँ तो बद़नामी मेरे घरवालों की होगी। आप को तो पता ही होगा कि गाँव में अगर कुछ ग़लत करो तो बद़नामी घरवालों के सिर आती है। वैसे तो गाँव में मेरे काफी दोस्त ये सब काम मेरे सामने भी करते थे पर मैं मना कर देता था, इसलिए गाँव में काफी कम ही दोस्त थे। जो थे मेरी ही तरह के थे जो खीर देख तो सकते थे, पर खा नहीं सकते।

अब कहानी पर आता हूँ। तो दोस्तों काफी समय तक ना तो वो मुझसे कुछ कहती, ना ही मैं उसमें दिलचस्पी लेता, क्योंकि उस समय वहाँ कुछ बनने के लिए आया था। ऐसे ही दिन-महीने गुज़रते रहे। बात तो हो ही जाती पर कभी प्यार वाली बात नहीं होती। एक दिन शाम को मैं ऑफिस से घर आया और हाथ-पैर धोकर छत पर चला गया। वहाँ पर वह, उसका भाई और मेरी २ साल की भतीजी वहाँ खेल रहे थे। इतने में वे तीनों आकर मुझे च्यूँटी काटने लगे, तो मैंने भी बुलबुल की चुटकी ली। मेरे चुटकी काटने से वह रोने लगी और छत से नीचे चली गई। मैंने सोचा कि कहीं उसने नीचे जाकर सब को बता दिया तो मेरा जीना हराम हो जाएगा, क्योंकि मेरा भाई बड़ा हरामी है, साले ने मेरा जीना मुश्किल कर रखा था।

थोड़ी देर बाद वह फिर से ऊपर आई और आकर मेरे साथ खड़ी हो गई, तो मेरी जान में जान आई, वरना मैं तो सोच रहा था कि बेटा मनीष, आज पिटने के लिए तैयार हो जा। कुछ ही देर बाद उस के मुँह से अपना नाम सुनकर मैं चौंक गया। उसकी वह आवाज़ आज भी मुझे याद आती है। आए भी क्यों नहीं, आख़िर पहली बार मैं किसी के मुँह से \'आई लव यू\' सुन रहा था। मेरा तो माथा ही ठनक गया। और वह यह बोलकर चली गई, फिर मैं काफी देर तक सोचता रहा कि मैं क्या करूँ। अन्त में बिना किसी निर्णय पर आए हुए मैं भी नीचे आ गया।

रात को खाना खाकर सोने के लिए अपने बिस्तर पर चला गया। मैं जहाँ सोता था वहाँ पर बर्तन धोने जाने का रास्ता था। मैं सो रहा था या यों कहें कि मैं उसी के बारे में सोच रहा था कि तब तक वह हाथ में बर्तन लेकर धोने के लिए वहाँ आकर खड़ी हो गई और मुझे देखने लगी। मैं आँखें बन्द करके सोच रहा था, तो उसने आराम से बर्तन नीचे रखे और मेरे होठों को किस कर लिया, वह मेरा किसी लड़की द्वारा किया गया पहला किस था। तो मैं उठ पड़ा और सोचा कि अगर यह एक लड़की होकर इतना कर सकती है, तो मैं लड़का होकर क्यों शान्त सोया पड़ा हूँ। मैंने भी उसी स्टाईल में लगभग १५-२० मिनट तक उसे किस किया। फिर मैंने जाना कि किस क्या होता है। फिर वह वहाँ से चली गई। अब ना तो मैं ठीक से काम कर पाता था, ना ही ठीक से पढ़ पाता था, दिन-रात उसी के बारे में सोच-सोच कर मैं ५४ से ४८ किलो का हो गया था। मेरे चाचा-चाची कहते कि द़िल लगाकर पढ़ाई कर रहा है तो बीमार हो गया है, एक काम कर यो तो तू काम कर या पढ़ाई कर, थोड़ा बोझ हल्का हो जाएगा।

पर उनको तो पता नहीं था कि मेरा द़िल तो कहीं और ही लगा हुआ है, तो पढ़ाई में कहाँ से लगेगा। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था इसलिए मैं जहाँ भी उसे अकेले में देखता था या पाता तो तुरन्त ही जाकर उसके होठों को चूमने लगता। वह भी मना नहीं करती, क्या करूँ कुछ समझ में नहीं आ रहा था, तब तक होली भी नज़दीक आ रही थी। हमारे चाचा-चाची ने घर जाने का फैसला किया कि इस बार गाँव में ही होली मनाएँगे।

मैं तो जा नहीं सकता था। अगर मैं जाता तो मेरी कमाई, पढ़ाई, और चुदाई तीनों पर कोई और होली खेल जाता। तो वे लोग गाँव चले गए, घर में मैं रह गया, साथ में मैं मेरी भाई-भाभी और मेरी दो भतीजियाँ। और वह तो पहले से ही अपने पूरे परिवार के साथ वहाँ थी ही।

एक रात हम सब छत पर सो रहे थे कि तेज़ बारिश शुरू हो गई, सब नीचे भाग आए सोने कि लए। मौसम तो ऐसा था कि जिनकी शादी हो गई थी वो तो बीवी के साथ लगे होंगे, जिनकी नहीं हुई वह लण्ड पकड़कर सो रहे होंगे, मेरी तरह। उस रात मैं भगवान को कोस रहा था, आप को अगर पता न हो तो एक बात बता दूँ कि दिन में एक बार आप जो भी बोलते हैं, वह सच हो जाता है, शायद वही हुआ।

रात के लगभग २ बज रहे थे, मैं बरामदे में ही अकेला सो रहा था, भाई-भाभी अन्दर कमरे में कुण्डी लगाकर सो रहे थे। अचानक मुझे पायल की आवाज़ सुनाई पड़ी, मैंने आँखें खोली तो देखा कि बुलुबल आराम से नीचे उतर रही है। वह सीधा मेरे बिस्तर पर आई और मेरे साथ लेट गई। मैं तो अचानक हवा में उड़ने लगा, हे भगवान, आख़िर वह दिन आ ही गया ! मैंने उसकी तरफ मुँह किया और उसे किस करने लगा और वह भी मेरा साथ देने लगी। मैंने उसे सिर से लेकर पाँव तक किस किया, वह तो जाने कितने जन्मों की प्यासी लग रही थी पता नहीं।

जब मैं उसे किस कर रहा था तो इतने में उसने मेरा लण्ड पजामे में से बाहर निकाल लिया और हिलाने लगी। मैं तो हैरान रह गया, ये सब इसने कहाँ से सीखा? मैंने उसके होठों को जी-भर चूसा और लाल कर दिया। फिर उसकी शमीज खोलकर मस्त हो रहीं चूचियों को जी भरकर चूसा। उसकी ओओओओओओ... उउउउउउउ... आआआआआआ आआआआआआहहहह की आवाज़ मेरे जोश भर रही थी। मैं ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूचियों को दबा व चूस रहा था। फिर मैं धीरे से एक ऊँगली उस कभी खत्म न होने वाली गहराई यानि उसकी योनि के ऊपर घुमा रहा था, अचानक वह ज़ोर-ज़ोर से अपने चूतड़ों को ऊपर-नीचे करने लगी और कुछ देर बाद शान्त हो गई। फिर मैंने अपना लण्ड उस के मुँह में दे दिया और वह दनादन चूसने लगी और मैं उसकी चूत चाट रहा था कि कहानी में ट्विस्ट आ गया।

मुझे लगा कि कोई अन्दर से कुण्डी खोल रहा है। हम शान्त हो गए। फिर धीरे-धीरे कुण्डी खुलने की आवाज़ हुई तो हमारी जान ही निकल आई, वह वहाँ से उठकर सीढ़ियों से ऊपर चली गई, और मैं शान्ति से सो गया। फिर पाया कि काफी देर तक कोई अन्दर कमरे से नहीं आया फिर भी कुण्डी जैसी कुछ आवाज़ रह-रहकर आतीं, तो मैंने ध्यान दिया तो पाया कि हवा के कारण गाँधी की तस्वीर दरवाज़े में रगड़ खाकर आवाज़ पैदा कर रही थी। मैंने मन ही मन सोचा क्या यार सही में तुम गाँधी हो, अच्छी खासी चुदाई में तुमने आन्दोलन कर दिया। मैं लण्ड पकड़कर सो गया। थोड़ी ही देर में वह आई और अपना दुपट्टा लेकर जाने लगी तो मैंने उसे ज़बरदस्ती लिटा लिया, वो मना करती रही फिर भी मैं नहीं माना और उसे फिर से नंगा कर दिया, फिर से उसको चूमा-चाटा फिर कुछ देर तक ना-ना करने के बाद वह मान गई और साथ देने लगी।

फिर मैंने उस को उसकी कच्छी उतारने के लिए कहा तो वो बोली- सब तो तुमने उतार ही दिया है, अब ये मैं क्यों उतारूँ, तुम ही उतार दो।

मैंने फिर वह भी उतार दी और अपनी छोटी ऊँगली को ओ बना के घुमाने लगा तो मुझे ऐसा लगा कि वह अभी मझे धक्का देकर गिरा देगी, लेकिन मैंने धीरे-धीरे ही घुमाना उचित समझा और उसकी चूचियों को एक-एक करके चूसता भी रहा। फिर मैंने ऊँगली निकाल कर अँगूठा डाला और फिर ओ की तरह घुमाने लगा तो वह उछलने लगी और सिसकारियाँ लेने लगी। अब ना तो मुझ से रहा जा रहा था ना ही उससे सहा जा रहा था।

मैंने उससे कहा- यार ! कब तक ये चूसते रहेंगे?

तो वह बोली- मैं तो कब से कहना चाह रही हूँ पर तुम हो कि चूस-चूस कर ही निकालते जा रहे हो।

तो मैंने कहा कि पहले बताना चाहिए था ना, मैं यह काम पहली बार कर रहा हूँ।

तो वह बोली- तो मैं कौन सी मास्टर हूँ, मेरा भी तो पहली बार ही है।

फिर मैं उसे चित लिटाकर उसके ऊपर आ गया और सारा काम अपने लण्ड के भरोसे छोड़ दिया। वह अन्दर जाने के लिए बेताब़ हो रहा था और रास्ता था कि लाख ढूंढने पर भी नज़र नहीं आ रहा था, फिर मैंने भी कोशिश की, पर बेकार। जब भी झटका मारता, लण्ड अन्दर जाने की बजाए पेट की तरफ निकल भागता।

फिर उसने कहा- कि किचन से थोड़ा तेल ले लो।

मैं किचन से तेल ले आया और उसकी चूत और अपने लण्ड पर खूब मालिश करवाई और की। फिर उसने लण्ड अपने हाथ में ले लिया और कहा- अबकी बार मैं कोशिश करती हूँ, पर धीरे-धीरे करना।

मैंने कहा- मुझे पता है जानम कि तुम और मैं दोनों ही नए हैं इस खेल में ! पर चिन्ता मत करो, मैं ख़्याल रखूँगा।

फिर उसने अपने हाथों से मेरा लण्ड अपने चूत की छेद के पास रखा और बोली- जानेमन थोड़ा रहम करना मेरे ऊपर और धीरे से धक्का लगाना !

तो मैंने पहला धक्का धीरे से लगाया, मुझे पूरा महसूस हो रहा था कि मेरे लण्ड का कितना हिस्सा बाहर है, और कितना अन्दर जा चुका है। मैंने अपने पहले ही झटके में अपना पूरा सुपाड़ा अन्दर पेल दिया तो वह तिलमिला उठी और अपने दाँतों को ज़ोर-जो़र से चबाने लगी फिर बोली- मुँह में कुछ दो नहीं तो मैं चिल्ला उठूँगी।

फिर मैंने अपनी जीभ उसे चूसने के लिए दी और वह चूसने लगी। इस बार मैंने एक और ज़ोरदार झटका मारा और मेरा आधा लण्ड अन्दर समा गया और वह इतनी ज़ोर से छटपटाई कि मैं घबरा गया, कि कहीं कुछ हो तो नहीं गया। उसने लाख़ छूटने का प्रयास किया पर मैंने छूटने नहीं दिया और फिर मैं वहीं रूक गया। उसकी जुबान को चूसने लगा, जब उसे थोड़ा आराम मिला तब उसने खुद ही कहा कि अब क्या चूस रहे हो, अब तो पूरा ही डाल दो, तो मैंने एक आख़िरी ज़ोरदार झटका मारा और वह उछल कर शान्त हो गई, फिर मैंने उसे हर कोण से चोदा और वह आ आआआआ आइ.... आआआआआ... आआआआआ उउउउउउ आआआहहह... उउउउभभभ... आआआआहहहह आआआआआ करती रही।

मैंने उसे अपने ऊपर आने के लिए कहा। यारों अगर आप चुदाई का असली मज़ा लेना चाहते हैं तो फिर आप ख़ुद लेट जाइए और उसे करने के लिए बोलें, फिर देखेंगे कि चुदाई क्या चीज़ होती है। और फिर वह मेरे ऊपर आकर पहले तो धीरे-धीरे फिर ज़ोर-ज़ोर से आटे की चक्की चलाने लगी। मेरा तो मत पूछिए, मैं तो जैसे हवाओं में था। तभी वह बोली- अब ज़रा ज़ोर-ज़ोर से कर दो, मैं आने वाली हूँ।

फिर मैंने उसे लिटा के जो झटके मारे, १०-१५ में ही उसने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया और मुझे भी एक ऐसी सुखदायक कँपकँपी लगी जैसे कोई मुझे स्वर्ग की सैर करवा रहा हो। फिर शुरू से लेकर अन्त तक कर मैंने उसके एक पल का भी मज़ा खराब न करके वो मुझमें और मैं उसमें समाने की कोशिश करते रहे और वह मेरा हौसला बढ़ाती रही। मैंने ज़ोरदार शाट्स मारे, फिर हम शान्त होकर वहीं पड़े रहे। १५ मिनट बाद हम उठे, बाथरूम में साथ-साथ गए, एक-दूसरे को साफ़ किया। उसने मुझे गुडनाईट किस दिया और चली गई।

१५ दिन बाद मेरी नौकरी फ़रीदाबाद में डेवेलपमेन्ट में एक कैड ऑपरेटर के रूप में लग गई और मैंने दिल्ली छोड़ दी।

उसके बाद आज तक कभी सेक्स करने का दुबारा मौका नहीं मिला, उसके बाद ना तो उसने कभी मुझे फोन किया, ना मैंने उसे ही। उसकी शादी हो चुकी है, और वह काफी खुश है।